A group of five men at a formal event, with one man presenting a framed document to another who is wearing a traditional scarf, while others look on.

छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय, कानपुर के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग द्वारा महान स्वतंत्रता सेनानी, निर्भीक पत्रकार एवं ओजस्वी लेखक गणेश शंकर विद्यार्थी जी की जयंती के अवसर पर 26 अक्टूबर 2026 को एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. विनय कुमार पाठक जी ने की। इस अवसर पर देश के प्रतिष्ठित वरिष्ठ पत्रकार, लेखक एवं पद्मश्री सम्मान से अलंकृत श्री आलोक मेहता जी मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।

कार्यक्रम का आयोजन विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग द्वारा किया गया। इस अवसर पर गणेश शंकर विद्यार्थी जी के विचारों, निर्भीक पत्रकारिता और सामाजिक उत्तरदायित्व को स्मरण करते हुए समकालीन समय में पत्रकारिता एवं सामाजिक उत्तरदायित्व विषय पर विचार-विमर्श किया गया। सभागार में 500 से अधिक श्रोताओं की उपस्थिति ने कार्यक्रम को विशेष गरिमा प्रदान की।

पद्मश्री आलोक मेहता जी के पत्रकारिता योगदान पर विशेष डॉक्यूमेंट्री

कार्यक्रम का एक प्रमुख आकर्षण देश के वरिष्ठ पत्रकार पद्मश्री आलोक मेहता जी के जीवन, पत्रकारिता यात्रा, संपादकीय नेतृत्व एवं उल्लेखनीय योगदान पर आधारित लगभग चार मिनट की विशेष डॉक्यूमेंट्री का प्रदर्शन रहा। इस डॉक्यूमेंट्री का निर्माण बीएजेएमसी प्रथम वर्ष की छात्रा आरोही तिवारी ने पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के प्रोफेसर डॉ. कौशल त्रिपाठी जी के मार्गदर्शन में किया।

यह डॉक्यूमेंट्री भारतीय पत्रकारिता में आलोक मेहता जी के योगदान को नई पीढ़ी के विद्यार्थियों तक पहुँचाने की एक सराहनीय अकादमिक पहल है। एक छात्रा द्वारा देश के प्रतिष्ठित पत्रकार के जीवन और कार्यों को शोधपरक दृष्टिकोण से प्रस्तुत करना विद्यार्थियों की रचनात्मकता, अध्ययनशीलता और व्यावहारिक पत्रकारिता के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

पाँच दशकों से अधिक की पत्रकारिता यात्रा और 30 पुस्तकों का साहित्यिक योगदानपद्मश्री आलोक मेहता जी भारतीय पत्रकारिता के उन प्रतिष्ठित व्यक्तित्वों में शामिल हैं, जिन्होंने पाँच दशकों से अधिक समय तक प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक एवं अन्य मीडिया माध्यमों में उल्लेखनीय योगदान दिया है। वे वरिष्ठ पत्रकार, लेखक, राजनीतिक विश्लेषक और संपादकीय नेतृत्व के लिए विख्यात हैं। पत्रकारिता एवं साहित्य के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए उन्हें वर्ष 2009 में पद्मश्री से सम्मानित किया गया।

उन्होंने नवभारत टाइम्स, हिंदुस्तान, नई दुनिया, दैनिक भास्कर, आउटलुक हिंदी, गवर्नेंस नाउ तथा अन्य प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में संपादक, प्रधान संपादक एवं संपादकीय नेतृत्व की महत्वपूर्ण भूमिकाएँ निभाई हैं। उन्होंने जर्मनी के कोलोन में वॉयस ऑफ जर्मनी की हिंदी सेवा तथा वॉयस ऑफ अमेरिका के साथ भी कार्य किया। वे एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया के पूर्व अध्यक्ष एवं महासचिव रह चुके हैं।

आलोक मेहता जी का साहित्यिक योगदान भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। उनके नाम लगभग 30 पुस्तकों का उल्लेख मिलता है, जिनमें पत्रकारिता, राजनीति, समाज, लोकतंत्र, अंतरराष्ट्रीय संबंध, यात्रा-वृत्तांत और संस्मरण जैसे विविध विषय शामिल हैं। उनकी प्रमुख पुस्तकों में Power, Press and Politics, Indian Journalism: Keeping It Clean, पत्रकारिता की लक्ष्मण रेखा, भारत में पत्रकारिता, नामी चेहरे यादगार मुलाकातें, सफर सुहाना दुनिया का तथा Revolutionary Raj: Narendra Modi’s 25 Years शामिल हैं। उनकी पुस्तक Revolutionary Raj की प्रस्तावना केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने लिखी है। खोजी पत्रकारिता, निर्भीकता और सत्य के प्रति प्रतिबद्धता का संदेश

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि पद्मश्री आलोक मेहता जी ने विद्यार्थियों के साथ अपने लंबे पत्रकारिता जीवन के अनुभव साझा किए। उन्होंने चर्चित चारा घोटाले, हरियाणा के चौटाला प्रकरण, भाजपा के तत्कालीन वरिष्ठ नेता के.एन. गोविंदाचार्य की डायरी से जुड़े खुलासों, तांत्रिक चंद्रास्वामी से संबंधित खोजी पत्रकारिता तथा ताज एक्सप्रेस-वे एवं भूमि विवादों जैसे महत्वपूर्ण मामलों का उल्लेख करते हुए खोजी पत्रकारिता की चुनौतियों और जिम्मेदारियों पर प्रकाश डाला।

उन्होंने अपने अनुभवों के माध्यम से विद्यार्थियों को समझाया कि पत्रकारिता केवल समाचारों के संकलन और प्रसारण तक सीमित नहीं है, बल्कि लोकतंत्र की मजबूती, जनहित की रक्षा और सत्ता से सवाल पूछने का एक महत्वपूर्ण माध्यम है। तथ्यों की पुष्टि, निष्पक्षता, साहस और नैतिक मूल्यों के प्रति प्रतिबद्धता एक पत्रकार की सबसे बड़ी पहचान है।विपरीत परिस्थितियों में भी सत्य के साथ खड़े रहना और पत्रकारिता के मूल्यों से समझौता न करना ही निर्भीक पत्रकारिता का वास्तविक धर्म है। आलोक मेहता जी के अनुभव विद्यार्थियों के लिए पत्रकारिता के व्यावहारिक पक्ष को समझने का महत्वपूर्ण अवसर रहे।

पत्रकारिता की विरासत और नई पीढ़ी के बीच सार्थक संवाद

गणेश शंकर विद्यार्थी जी की जयंती पर आयोजित यह कार्यक्रम भारतीय पत्रकारिता की गौरवशाली परंपरा, निर्भीक अभिव्यक्ति और सामाजिक उत्तरदायित्व के मूल्यों को पुनः स्मरण कराने वाला रहा। एक ओर गणेश शंकर विद्यार्थी जी की निर्भीक पत्रकारिता की विरासत थी, तो दूसरी ओर पद्मश्री आलोक मेहता जी का अनुभवसमृद्ध पत्रकारिता जीवन। इन दोनों के माध्यम से विद्यार्थियों को पत्रकारिता के आदर्शों, चुनौतियों और लोकतांत्रिक जिम्मेदारियों को समझने का अवसर मिला।

विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग की यह पहल विद्यार्थियों को देश के प्रतिष्ठित पत्रकारों के जीवन, विचारों और कार्यों से परिचित कराने के साथ-साथ शोध, रचनात्मकता और अकादमिक अध्ययन को प्रोत्साहित करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण है।

बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के शोधार्थी प्रभात दुबे कर रहे हैं पद्मश्री आलोक मेहता के योगदान पर शोध

विशेष उल्लेखनीय है कि बुंदेलखंड विश्वविद्यालय, झाँसी के शोधार्थी प्रभात दुबे देश के वरिष्ठ पत्रकार एवं पद्मश्री सम्मान से अलंकृत श्री आलोक मेहता जी के पत्रकारिता योगदान पर पीएचडी शोधकार्य कर रहे हैं। उनके शोध का शीर्षक है— “Contribution of Alok Mehta to Indian Journalism: A Special Study with Reference to Media and Politics” अर्थात् “भारतीय पत्रकारिता में आलोक मेहता का योगदान: मीडिया एवं राजनीति के विशेष संदर्भ में एक अध्ययन।”इस शोधकार्य के शोध-निर्देशक (सुपरवाइजर) प्रो. डॉ. कौशल त्रिपाठी जी हैं, जिनके मार्गदर्शन में प्रभात दुबे आलोक मेहता जी के पत्रकारिता जीवन, संपादकीय दृष्टिकोण, मीडिया एवं राजनीति के अंतर्संबंधों तथा भारतीय पत्रकारिता में उनके योगदान का अकादमिक अध्ययन कर रहे हैं।

यह शोध भारतीय पत्रकारिता के एक महत्वपूर्ण व्यक्तित्व के कार्यों, विचारों और अनुभवों को अकादमिक दृष्टिकोण से समझने तथा भावी पीढ़ियों के लिए उनके योगदान का दस्तावेजीकरण करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है।

सत्यनिष्ठा, निर्भीकता और लोकतांत्रिक मूल्यों को समर्पित पत्रकारिता की इस गौरवशाली परंपरा को आगे बढ़ाने में पद्मश्री आलोक मेहता जी का योगदान प्रेरणादायी है।

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