एक औपचारिक कार्यक्रम में खड़े लोग, एक टेबल के पीछे। मेज पर कुछ गिलास और कागजात रखे हैं। दीवार पर एक स्क्रीन पर लिखा हुआ पाठ दिख रहा है।

केंद्रीय विश्वविद्यालय जम्मू में भारतीय भाषाओं में पाठ्यपुस्तक विकास पर आयोजित दो दिवसीय राज्य स्तरीय कार्यशाला का समापनजम्मू, 3 नवंबर 2026। केंद्रीय विश्वविद्यालय जम्मू और भारतीय भाषा समिति, शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार के संयुक्त तत्वावधान में भारतीय भाषाओं में पाठ्यपुस्तक विकास विषय पर आयोजित दो दिवसीय राज्य स्तरीय कार्यशाला का सफलतापूर्वक समापन हो गया।

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समापन सत्र को संबोधित करते हुए केंद्रीय विश्वविद्यालय जम्मू के माननीय कुलपति प्रो. संजीव जैन ने उच्च शिक्षा में भारतीय भाषाओं को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि भारतीय भाषाओं में शिक्षा को प्रोत्साहित करना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। उन्होंने जम्मू-कश्मीर के विद्यार्थियों के लिए डोगरी, कश्मीरी और अन्य क्षेत्रीय भाषाओं में पढ़ाई करने तथा परीक्षाएं देने के अवसर विकसित करने की परिकल्पना प्रस्तुत की।

प्रो. जैन ने कहा कि भारतीय भाषाओं में प्रामाणिक, मौलिक और अकादमिक रूप से गुणवत्तापूर्ण पाठ्यपुस्तकों का विकास किया जाना चाहिए। यह पहल विकसित भारत-2047 के राष्ट्रीय संकल्प को साकार करने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।कार्यशाला के दौरान सात अकादमिक सत्र आयोजित किए गए, जिनमें जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के विषय विशेषज्ञों तथा शिक्षकों ने भाग लिया। इस अवसर पर पाठ्यक्रमों के मूल्यांकन, संस्थानों की मैपिंग और मातृभाषाओं में उपलब्ध पाठ्यपुस्तकों की जानकारी जुटाने के लिए विषयवार 20 समूहों का गठन किया गया।

इस दौरान लगभग 2.5 लाख मौलिक एवं अनूदित पुस्तकों को भारतीय भाषाओं में विकसित करने के महत्वाकांक्षी लक्ष्य पर भी चर्चा हुई। प्रो. वीरेंद्र कुंडल ने मातृभाषा आधारित शिक्षा की उपयोगिता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि मातृभाषा में शिक्षा से विद्यार्थियों की विषयों को समझने की क्षमता मजबूत होती है और उच्च शिक्षा में उनकी भागीदारी बढ़ती है।

कार्यशाला में शामिल शिक्षाविदों और शिक्षकों ने विभिन्न विषयों पर सार्थक चर्चा की तथा अपने महत्वपूर्ण सुझाव प्रस्तुत किए। कार्यक्रम के अंत में प्रतिभागियों को प्रमाणपत्र वितरित किए गए। साथ ही उच्च शिक्षा में भारतीय भाषाओं को मजबूत बनाने के प्रति प्रतिबद्धता दोहराई गई।केंद्रीय विश्वविद्यालय जम्मू ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 (NEP 2020) और विकसित भारत-2047 की भावना के अनुरूप समावेशी, सुलभ और बहुभाषी शिक्षा को बढ़ावा देने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।

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