अर्थशास्त्र विभाग के अकादमिक मंच ‘इको टॉक्स’ के अंतर्गत “UPI MDR: A necessary step towards financial sustainability or a threat to digital inclusion?” विषय पर वाद-विवाद प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। इस अवसर पर महाविद्यालय की प्राचार्या प्रोफेसर आशा यादव ने विद्यार्थियों का उत्साहवर्धन करते हुए विषय की प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला।

समारोह में उपस्थित लोग, एक महिला प्रमाण पत्र प्राप्त कर रही हैं, पृष्ठभूमि में प्रस्तुतीकरण स्क्रीन और अन्य प्रतिभागी हैं।

कार्यक्रम का शुभारंभ प्राचार्या प्रो. आशा यादव के संबोधन से हुआ। उन्होंने डिजिटल अर्थव्यवस्था में यूपीआई की बढ़ती भूमिका और विषय की प्रासंगिकता पर प्रकाश डालते हुए विद्यार्थियों को अपने विचार प्रस्तुत करने के लिए प्रेरित किया। कार्यक्रम की शुरुआत श्वेता के स्वागत भाषण से हुई, जिन्होंने प्रतियोगिता के नियमों से प्रतिभागियों को अवगत कराया।

वाद-विवाद के दौरान विद्यार्थियों ने एमडीआर लागू करने के पक्ष और विपक्ष में प्रभावशाली तर्क प्रस्तुत किए। पक्ष में बोलते हुए विद्यार्थियों ने कहा कि डिजिटल भुगतान प्रणाली की दीर्घकालिक वित्तीय स्थिरता के लिए उचित वित्तीय मॉडल आवश्यक है। एमडीआर से प्राप्त राजस्व डिजिटल बुनियादी ढाँचे, साइबर सुरक्षा और तकनीकी विकास को मजबूत करने में सहायक हो सकता है। उन्होंने बड़े व्यापारियों पर उनकी क्षमता के अनुसार शुल्क लगाने तथा छोटे व्यापारियों को राहत देने का सुझाव भी दिया।

वहीं, विपक्ष में विद्यार्थियों ने तर्क दिया कि यूपीआई की निःशुल्क सुविधा ने छोटे व्यापारियों और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को डिजिटल अर्थव्यवस्था से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उनके अनुसार, अतिरिक्त शुल्क डिजिटल भुगतान को हतोत्साहित कर सकता है तथा डिजिटल विभाजन को बढ़ा सकता है।

इस अवसर पर एम.ए. प्रथम वर्ष, द्वितीय वर्ष और बी.ए. तृतीय वर्ष की छात्राओं के अतिरिक्त प्रोफेसर इंदू उपाध्याय, डॉ. विजय कुमार, सुश्री सबा परवीन, डॉ. श्रीप्रिया सिंह एवं डॉ. रितेश उपस्थित रहे। कार्यक्रम में निर्णायक मंडल के रूप में डॉ. सुशील यादव और डॉ. अखिलेश कुमार राय उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन कुमारी श्वेता तथा धन्यवाद ज्ञापन कुमारी प्रियांशी ने किया।

प्रतियोगिता का समापन इस विचार के साथ हुआ कि वित्तीय स्थिरता और डिजिटल समावेशन दोनों एक-दूसरे के पूरक हैं। यूपीआई के भविष्य के लिए ऐसी संतुलित, पारदर्शी एवं समावेशी नीति आवश्यक है, जो डिजिटल भुगतान प्रणाली को आर्थिक रूप से टिकाऊ बनाने के साथ-साथ छोटे व्यापारियों और आम नागरिकों के हितों की भी रक्षा करे।

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