राजकीय महिला स्नातकोत्तर महाविद्यालय में आयोजित एक शैक्षणिक संगोष्ठी का दृश्य, जिसमें विभिन्न विद्वान और प्रवक्ता मंच पर उपस्थित हैं।

राजकीय महिला स्नातकोत्तर महाविद्यालय, सिरसागंज, फिरोजाबाद में अंतर्राष्ट्रीय रामायण एवं वैदिक शोध संस्थान, संस्कृति विभाग,उत्तर प्रदेश एवं राजकीय महिला स्नातकोत्तर महाविद्यालय, सिरसागंज के संयुक्त तत्वावधान में दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी “भारतीय रामकाव्य: परम्परा, संस्कृति और वैश्विक परिप्रेक्ष्य” का आयोजन के द्वितीय दिन के प्रथम सत्र की शुरूआत मां सरस्वती वंदना एवं नृत्य से प्रारंभ हुआ। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में डॉ श्यामपाल, प्राचार्य पंचायत राज राजकीय महाविद्यालय इटावा उपस्थित रहे। जिन्होंने अपने संबोधन में भगवान श्रीराम के जीवन आदर्शों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि श्रीराम का जीवन प्रेम, त्याग, समर्पण, मर्यादा और पारिवारिक संबंधों की गरिमा का अनुपम उदाहरण है।

विशेष रूप से उनके जीवन से भाइयों के प्रति प्रेम, स्नेह, त्याग एवं आपसी सहयोग की प्रेरणा मिलती है। श्रीराम और उनके भाइयों के पारस्परिक संबंध भारतीय संस्कृति में पारिवारिक एकता एवं आदर्श जीवन मूल्यों का संदेश देते हैं। उन्होंने कहा कि रामकाव्य भारतीय साहित्य एवं संस्कृति की अमूल्य धरोहर है, जो आज भी समाज को नैतिकता, सद्भाव और मानवीय मूल्यों का मार्ग दिखाता है। कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में
श्रीमती पुष्पा कश्यप ने राम के जीवन मूल्यों को रेखांकित किया। मुख्य वक्ता के रूप में डॉ. रामकांत राय ने रामकाव्य एवं युवा पीढ़ी पर अपने विचार प्रस्तुत किए। प्रोफेसर डॉ महेश आलोक जी ने अतिथि वक्ता के रूप में राम की शक्ति पूजा के माध्यम से तप, त्याग और शील को अपने जीवन में उतरने की आवश्यकता पर बल दिया।
महाविद्यालय की प्राचार्य प्रोफेसर डॉ कांति शर्मा जी ने मुख्य अतिथि एवं मुख्य वक्ताओं का अंगवस्त्र पहना कर और स्मृति देकर सम्मानित किया कार्यक्रम का संचालन डॉ राधे श्याम जी ने किया।
कार्यक्रम में उपस्थित अतिथियों, शिक्षाविदों एवं वक्ताओं ने रामकाव्य की वर्तमान सामाजिक एवं वैश्विक संदर्भों में उपयोगिता पर अपने विचार साझा किए। यह आयोजन साहित्य, संस्कृति एवं भारतीय ज्ञान परम्परा के संरक्षण और संवर्धन की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल रहा।

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