सिरसागंज (फिरोजाबाद)। भारतीय रामकाव्य की समृद्ध परंपरा, सांस्कृतिक विरासत और वैश्विक परिप्रेक्ष्य में भगवान श्रीराम के आदर्शों की प्रासंगिकता पर विचार-विमर्श के उद्देश्य से राजकीय महिला स्नातकोत्तर महाविद्यालय, सिरसागंज में 1 एवं 2 नवंबर 2026 को दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया जाएगा।

A banner promoting a cultural event titled 'Bharatiya Ramakatha: Parampara, Sanskriti Aur Vaishvik Parishekh' organized by the Rajkiya Mahila Snatakotara Mahavidyalay, featuring an image of Lord Rama.

अंतरराष्ट्रीय रामायण एवं वैदिक शोध संस्थान, संस्कृति विभाग, उत्तर प्रदेश तथा राजकीय महिला स्नातकोत्तर महाविद्यालय, सिरसागंज के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस संगोष्ठी का विषय ‘भारतीय रामकाव्य : परंपरा, संस्कृति और वैश्विक परिप्रेक्ष्य’ रखा गया है।संगोष्ठी का उद्देश्य रामकाव्य की परंपरा का पुनर्मूल्यांकन करते हुए वर्तमान वैश्विक संदर्भ में उससे जुड़े सांस्कृतिक, सामाजिक और नैतिक मूल्यों की प्रासंगिकता को स्थापित करना है। आयोजन के माध्यम से यह विमर्श किया जाएगा कि भगवान श्रीराम का चरित्र केवल धार्मिक आख्यान या साहित्यिक पात्र तक सीमित नहीं है, बल्कि भारतीय सांस्कृतिक चेतना, जीवन मूल्यों और सामाजिक आदर्शों का महत्वपूर्ण आधार है।

देश के विभिन्न विश्वविद्यालयों के विद्वान होंगे शामिल

संगोष्ठी में केंद्रीय हिंदी संस्थान, आगरा के प्रो. उमापति दीक्षित, आरबीएस डिग्री कॉलेज आगरा के प्राचार्य प्रो. विजय कुमार श्रीवास्तव, काशी हिंदू विश्वविद्यालय के प्रो. प्रभाकर सिंह, गोरखपुर विश्वविद्यालय के पूर्व प्रोफेसर अनिल राय, कालीकट विश्वविद्यालय के प्रो. मनोज कोटप्रवी तथा महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय, वर्धा के प्रो. मनोज राय सहित विभिन्न विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों के विद्वान आमंत्रित वक्ता के रूप में शामिल होंगे। दिल्ली विश्वविद्यालय, लखनऊ विश्वविद्यालय, पंजाब केंद्रीय विश्वविद्यालय सहित अन्य शैक्षणिक संस्थानों के शिक्षाविद भी संगोष्ठी में सहभागिता करेंगे।

रामकाव्य के विविध आयामों पर होगा विमर्श

संगोष्ठी में आदिकवि वाल्मीकि से आधुनिक काल तक रामकथा की विकास यात्रा, विभिन्न भारतीय भाषाओं में रामकाव्य, लोक साहित्य एवं जनजातीय साहित्य में रामकथा, मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम का स्वरूप, सामाजिक समरसता, रामकाव्य और युवा पीढ़ी, स्त्री-विमर्श तथा हाशिए के समाज जैसे विषयों पर चर्चा होगी। इसके अतिरिक्त इक्कीसवीं सदी में सुशासन और रामराज्य की प्रासंगिकता, रामकाव्य और ललित कलाएं तथा डिजिटल युग में श्रीराम पर आधारित एनिमेशन, सिनेमा और वेब सीरीज जैसे समकालीन विषय भी विमर्श का हिस्सा होंगे।

दो दिनों में होंगे विभिन्न शैक्षणिक सत्र

आयोजन के पहले दिन उद्घाटन सत्र के बाद रामकाव्य परंपरा के विकास, आधुनिक परिप्रेक्ष्य में श्रीराम तथा श्रीराम आधारित सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से संबंधित सत्र आयोजित होंगे। दूसरे दिन लोक में व्याप्त श्रीराम, श्रीराम के सांस्कृतिक स्वरूप और अन्य विषयों पर तकनीकी सत्र होंगे। समापन सत्र के साथ कार्यक्रम का समापन होगा।संगोष्ठी में शोधार्थियों और शिक्षकों को मौलिक एवं अप्रकाशित शोधपत्र प्रस्तुत करने के लिए आमंत्रित किया गया है। शोधपत्र यूजीसी विनियम 2018 के अनुरूप मान्य ISSN युक्त अंतरराष्ट्रीय रेफरीड पीयर-रिव्यूड जर्नल में प्रकाशित किए जाएंगे। शोधपत्र की शब्द सीमा लगभग 2000 शब्द निर्धारित की गई है।

पंजीकरण एवं आयोजन संबंधी जानकारी

संगोष्ठी में शिक्षकों के लिए पंजीकरण शुल्क 400 रुपये तथा शोधार्थियों के लिए 300 रुपये निर्धारित किया गया है। आयोजन का समय प्रतिदिन प्रातः 10 बजे से रहेगा। कार्यक्रम का आयोजन राजकीय महिला स्नातकोत्तर महाविद्यालय, सिरसागंज, फिरोजाबाद में होगा।प्रो. (डॉ.) कान्ति शर्मा महाविद्यालय की प्राचार्य एवं संरक्षक हैं। डॉ. अभिषेक प्रकाश संयोजक, डॉ. कृष्ण मोहन पाठक सह-संयोजक तथा डॉ. सनी कुमार वर्मा और डॉ. सोनल भार्गव आयोजन सचिव की भूमिका निभा रहे हैं। संगोष्ठी की विस्तृत जानकारी के लिए डॉ. अभिषेक प्रकाश (7985977643) एवं डॉ. कृष्ण मोहन पाठक (8922914089) से संपर्क किया जा सकता है।

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