भिलाई। सरस्वती शिशु मंदिर, सेक्टर-4 भिलाई में 1 नवंबर 2026 को प्रबुद्ध परिषद दुर्ग विभाग की बैठक आयोजित की गई। बैठक में “कुटुब—हिंदुत्व के समक्ष वर्तमान चुनौतियां एवं उसके प्रभाव” विषय पर विस्तार से चर्चा की गई। इस दौरान भारतीय संस्कृति, पारिवारिक संस्कार, बच्चों की शिक्षा, युवाओं के मार्गदर्शन और सामाजिक समन्वय जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर विचार-विमर्श हुआ। बैठक में कुल 15 लोगों की सहभागिता रही। हिंदुत्व और ज्ञान की शक्ति पर हुई चर्चा बैठक में श्री शशिकांत जी ने हिंदुत्व के विषय में अपने विचार प्रस्तुत किए। चर्चा के दौरान ज्ञान की शक्ति को व्यक्ति के आत्मविश्वास का आधार बताया गया। साथ ही खान-पान और जीवनशैली का मन एवं विचारों पर पड़ने वाले प्रभाव पर भी विचार रखे गए। भारतीय संस्कृति और परंपराओं के मूल स्वरूप को समझने की आवश्यकता पर जोर दिया गया। इस क्रम में मनुस्मृति जैसे पारंपरिक ग्रंथों के विषय में भी चर्चा हुई। शैक्षिक खबरों से अपडेट रहने के लिए The Campus News के व्हाट्स एप चैनल को फॉलो कीजिए। मातृभाषा और भारतीय संस्कृति से जुड़ाव पर जोर बैठक में घर के कार्यक्रमों और सांस्कृतिक गतिविधियों को प्राथमिकता देने की आवश्यकता बताई गई। वक्ताओं ने मातृभाषा को संस्कृति और समाज से जुड़ाव मजबूत करने का महत्वपूर्ण माध्यम बताया। परिवार के माध्यम से भारतीय परंपराओं एवं संस्कारों को अगली पीढ़ी तक पहुंचाने पर भी विशेष जोर दिया गया। चर्चा में कहा गया कि सांस्कृतिक मूल्यों को दैनिक जीवन और पारिवारिक गतिविधियों का हिस्सा बनाना आवश्यक है। बच्चों की शिक्षा में परिवार की भूमिका महत्वपूर्ण बच्चों की शिक्षा एवं मार्गदर्शन को लेकर बैठक में कई महत्वपूर्ण बिंदु सामने आए। बच्चों को केवल करियर-केंद्रित बनाने के बजाय परिवार और समाज के प्रति जिम्मेदार नागरिक बनाने की आवश्यकता पर बल दिया गया। माता-पिता को बच्चों के साथ पर्याप्त समय बिताने, उनकी रुचियों को समझने और जीवन में सही दिशा प्रदान करने की बात कही गई। इसके साथ ही परिवार और शिक्षा के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने पर चर्चा हुई। युवाओं को भारतीय संस्कृति से जोड़ने की आवश्यकता युवाओं पर पश्चिमी संस्कृति के बढ़ते प्रभाव और भारतीय मूल्यों से उनकी दूरी को लेकर चिंता व्यक्त की गई। बैठक में युवाओं को भारतीय संस्कृति एवं परंपराओं से जोड़ने के लिए प्रभावी प्रयास करने की आवश्यकता बताई गई। रामकृष्ण मिशन जैसे संस्थानों के माध्यम से युवाओं के साथ संपर्क और संवाद बढ़ाने के विषय पर भी चर्चा हुई। सामाजिक एवं पारिवारिक मूल्यों को मजबूत बनाने को समय की महत्वपूर्ण आवश्यकता बताया गया। संगठनात्मक और सामाजिक समन्वय पर मंथन बैठक में विभिन्न विषयों की मैपिंग, प्राथमिकता निर्धारण और सामाजिक गतिविधियों में समन्वय स्थापित करने पर भी विचार किया गया। समस्याओं के समाधान के लिए सामूहिक प्रयासों तथा सामाजिक गतिविधियों के एकत्रीकरण की आवश्यकता पर बल दिया गया। बैठक के समापन पर इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि भारतीय संस्कृति, हिंदुत्व, शिक्षा और संस्कारों के माध्यम से समाज तथा आने वाली पीढ़ियों को मजबूत बनाया जा सकता है। इसके लिए परिवार, समाज और संगठन को मिलकर निरंतर प्रयास करने की आवश्यकता है। Share this: Share on X (Opens in new window) X Share on Facebook (Opens in new window) Facebook Like this:Like Loading… Related पोस्ट नेविगेशन KTS 5.0: देशभर के 1000 उच्च शिक्षण संस्थानों में छात्रों की भागीदारी, 15 नवंबर तक रजिस्ट्रेशन का मौका AI के दौर में मीडिया प्रतिनिधित्व और समावेशी संचार पर दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन 18-19 नवंबर को